पुत्र किसे कहते है ?? ध्यान से सुनिये
पुत्र के तीन कर्तव्य हैं -----
(१) जीवितो वाक्य करणात् (२) क्षयाहे भूरि भोजनात्
(३) गयायां पिण्ड दानाच्च(४) त्रिभिर्पुत्रश्च पुत्रता ।
----- १) जब तक माता - पिता जीवित रहें तब तक पुत्र का कर्तव्य है कि सदा उनकी आज्ञा का पालन करे , आज्ञा पालक बन कर रहे ।
ये नहीं कि जीवितावस्था में खूब दु:ख दिया गया और मरने के बाद दिल खोलकर खर्च , दान, पिण्ड आदि ----तो ऐसा करना सब निष्फल होता है , ऐसा करना मात्र दिखावा है ।
२ ) माता - पिता के मरणोपरांत अपने बंधु बांधव को श्रद्धा के साथ भोजन करावे ।
३) फिर सुसमय पाकर गया में जाकर पिण्ड दानादि कर उसे तृप्त करे ।
इन तीन कर्मों के करने पर ही पुत्र की पुत्रता है
अन्यथा पुत्र की पुत्रता निष्फल है , व्यर्थ है ।
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